Wednesday, September 3, 2008

बीहार में बाढ़ की तबाही

Flood In Bihar
बीहार में बाढ़ की तबाही से पुरी तरह से बर्बाद हो रही है। सरकार तो हाथ पे हाथ रखे बैठी है। कीसी को कोई पता ही नही चल रहा है की काया कीया जाए। ये तो सब बकवास ही है की कीसी को कुछ नही समझ में नही आ रहा है। बात तो यह है की यह सरकार कुछ करना ही नही चाहती है।

बात यह नही की बढ़ हर सल् आ जाती है बात तो यह है की हर साल दलालों, नेतो की जेबे भरती है बाढ़ से तो उनको क्या जरुरत है बाढ़ की हल खोजने की। वो तो चाहते ही है की बाढ़ आए और उनकी दीन आए। पर आम जनता पर क्या बीतती है वो तो आम जनता ही जानती है।

पुरी की पुरी ६ लाख आबादी मधेपुरा की बर्बाद हो रही है। कहने के लीये सेना भेजा गया है। पर क्या सेना क्या कर रही है उनकी भूख दूर कर रही है की उनकी बर्बाद हुई जीवन की संपती बचा रही है। मुझे तो लगता है लोग बच भी गए तो बढ़ के बाद बीना भोजन के मर जायंगे और सरकार की फर्ज तो केवल बाढ़ तक है बाढ़ के बाद नही।

सरकार पहले से बाढ़ की हल नही खोजती है की बाढ़ नही आए ये तो बाढ़ को बुलाती है फीर सहायता के नम पर सब को लुटती है। बात करते है भारत चमकती भारत है पर ये है तस्वीर चमकती और उभरती भारत की जहाँ लोगो की जीवन देखने पे आत्मा डर जाती है.

Tuesday, August 26, 2008

कद्दू का बर्फी

कद्दू का बर्फी के बनने के तरीके --

सामग्री :

घी चमच
कद्दू कटोरी
दूध कटोरी
चीनी कटोरी
नारियल गोला चुरा
खोया कटोरी
गुलाब जल चमच
पिस्ता ५० ग्राम
बादाम ५० ग्राम

बनने की वीधी :

कडाही में चमच घी डालेंगे। गरम करने के बाद उसमे कसा हुआ कटोरी कद्दो डाल कर भूनेंगे। थोड़ा पकने के बाद कटोरी दूध डाल कर पकेंगे। चीनी डालेंगे, कसा हुआ नारियल डालेंगे, कटोरी खोया और बार चमच देसी घी डालेंगे। उसके बाद एक थाली में ठंडा होने के लिए फैला देंगे। उसके बाद उसपर चमच गुलाब जल डालेंगे फ़िर पिस्ता और बादाम से सजा देंगे।

अंत में, ठण्ड होने के बाद चाकू से बर्फी के साइज़ में उसे कट देंगे। अब आपका बर्फी तैयार हो चुका है।

Saturday, August 9, 2008

भारत की शान

हम बच्चे भारत की शान है
हिम्मत हमारी पहचान है
धरती पे जन्मे मोती है, हम
मेहनत करना सीखे हम।

बडो ने हमें बताया है
टीचर ने हमें सिखाया है,
आगे बढे और जीते हम
मेहनत करना सीखे हम।

आलस ने हमें बिगाडा है
मेहनत ने हमें सवारां है
बतला दे हर किसी को हम
मेहनत करना सीखे हम।

हर से ना कभी घबराना है
कदम से कदम मिलाना है
अब करें नमस्ते सभी को हम
मेहनत करना सीखे हम।

रश्मी

Saturday, August 2, 2008

आजकल हमारे देश भारत में क्या हो रहा है?

बहुत कुछ आजकल सुनाने को मील रही हैजम्मू में क्या चल रहा है? रोज-रोज मारपीट क्यों हो रही है? सरकार क्या कर रही है? सुनते है की अमरनाथ के जमीं के बीबाद पे यह सब कुछ चल रहा हैधर्म के नाम पर ही सब कुछ चलता है यहाँ तभी तो भारत नाम है इस देश का

दूसरी बात है की देश में मंदी की दौर चल रही है? पैसे का दम घट रहा हैपुरा सरकार परेसान हैआखीर ये काया हो रहा है? जबकी दूसरी छोर पे बड़ी-बड़ी कंपनी बहुत मुनाफा बटोर रहे हैदाम बढ़ रहा है सब चीज का?

तीसरा समाचार है की भारत नुकलेअर डील कर रहा हैऔर यह ३२ सल् के बाद इसको यह मौका मीला है

सार्क सम्मेलन भी सुरु हो चुका है। ओलम्पिक भी सुरु होने वाला है.

Wednesday, July 23, 2008

हिन्दी सीनेमा की मांग

क्या आप को ऐसा लगता है की हिन्दी सीनेमा की मांग जो पहले थी आज भी है ? अगर नही है तो क्या कारण है की दीन दीन हिन्दी सीरियल की तरह हिन्दी सीनेमा की भी मांग कम होती जा रही है? मेरे हीसाब से जीस तरह हिन्दी सीरियल मध्य वर्गीय परीवार पर आधारित होती है उसी तरह हिन्दी सीनेमा भी अब उच्च वर्गीय परीवार की दास्ताँ बन गई है

इसके अलवा यह कोई अच्छी कहानी पे आधारित होने के बजाय प्रेम कहानी पे होती हैसीनेमा में न्या कहने के लीये कुछ नही होतासब कुछ कही कही से नक़ल की होती हैइसके अलवा एक हीरो को चमकाने वाली बात नीहीत होती है

आप हॉलीवुड की बात करे तो हमेशा न्या कुछ कुछ पा सकते हैपर जब बॉलीवुड की बात करे तो कॉमेडी में भी बन्वातीपन की बू आती हैअरे भाई नैचुरल भी कुछ होता है


Sunday, July 6, 2008

लाजबाब खीर - क्दू का!!!

खीर खाना सभी को पसंद है। पर वो जब कीसी अनोखी चीज की बने तो बात कुछ और ही है। आईये आज हम कदु का खीर बनाना सीखे।

सामग्री:

कचा कदु
दूध
चीनी
घी

बनाने की वीधी:

कदु का महीन काट ले। उसे दूध में पकाए चीनी के साथ, जब तक वो पाक न जाए। उसके बाद उसे दुसरे बर्तन में रखे। अब कीसी बर्तन में घी गरम करे। उसके बाद उसमे पका हुआ क्दू डाले। थोरी देर उसे चलाये।

अब खीर आपका तयार है। ये है क्दू का खीर।

Monday, June 23, 2008

शायरी के पन्ने

ये माना की हम आपके काबील नही
पर हम आप के लीये क्या है उनसे
पूछे जीन्हे हम हासिल नही

चाँद भी चौकोर का इंतजार करता है
प्यार भी अपने प्यार का इंतजार करता है
बहार भी पतझर का इंतजार करती है
जीन्दगी भी एक जीन्दगी का इंतजार करती है

मै देखती हूँ की वह मुझे देख के शर्मा जाते है
मै देखती हूँ की वह मुझे देख के नज़ारे झुका लेते है
खुदा का सुकर है की वह मुझे पहचान लेते है

मैंने सपने सजाये थे आपके याद में
मैंने यादे बनाये थे आपके साथ में
हम यादे बनाये थे हमारे साथ में
पर आप हो गए जुदा हमारे साथ से

दील में काया है पन्नो में बयां नही हो सकता
सागर में जीतना पानी है वह कलसे में नही सकता
नजरो में जो बाते है वह जुबान से बयां नही हो सकता